चीन, भारत और नेपाल के बीच खाई खोदना शुरू कर दिया है।

  • भारत-नेपाल सीमा से वरिष्ठ पत्रकार पंकज रंजीत की विशेष रिपोर्ट।
    जी हां, पूरे विश्व का
    विश्वासघाती देश चाईना डोकलाम हाथापाई विवाद के बाद अपना उल्लू सीधा करने के लिये अब भारत और नेपाल के बीच खाई खोदना शुरू कर दिया है।
    नेपाल की माओवादी, विचारधारा सरकार के प्रधानमंत्री के.पी.शर्मा ओली जो खासकर चीन समर्थित हैं,ने आजकल भारत के खिलाफ जहर उगलने शुरू कर दिए हैं,जिसके अंतर्गत नेपाल की जनता को भड़काया जा रहा है,जिसके परिणाम स्वरूप नेपाल में विद्रोह की लहर दो फाड़ में बटने लगें हैं जो,नेपाल सरकार को किसी भी क्षण गिराने में प्रबल हो सकती है।
    चाईना षड़यंत्र के मुताबिक नेपाल ने अपने राजनीतिक नक्शे में भारतीय सीमा के उत्तराखंड राज्य के पिठौड़ागढ़ जिला अंतर्गत के निम्नलिखित स्थानों में लिपुलेख, लिम्पियाधुरा,और कालापानी की जमीन को दिखाकर नेपाल के नया नक्शा में शामिल कर एक नया और बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है।इस विवाद के मद्देनजर नेपाल में भारत के खिलाफ विद्रोह के लहर तब और भी गोते लगाने शुरू कर दिये जब नेपाल के माओ विचारधारा वाले चीन समर्थित प्रधानमंत्री के.पी.शर्मा ओली,विदेश मंत्री प्रदीप गयावालिस,नेपाली मुल की ही भारतीय सिनेमा स्टार मनीषा कोईराला, द्वारा तरह तरह के विरोध नेपाली जनता के समक्ष सुमार होने लगे।यही नहीं इन लोगों के द्वारा जो विरोध हुआ सो हुआ,साथ ही भारत के तमाम सवा सौ करोड़ देश वसियों के मान-सम्मान से भी खिलवाड़ करने की बात प्रमाणित होने लगी।
    इस घटना को लेकर एक ओर जहाँ एक मित्र राष्ट्र नेपाल के प्रधानमंत्री🇳🇵द्वारा उनके ही संसद में,हमारे देश के सबसे महत्वपूर्ण चिन्ह अशोक स्तम्भ के “सत्यमेव जयते” पर कटाक्ष कर अपमानित किया जा रहा है,वहीँ दूसरी ओर संकीर्ण विचार धारा वाली असंवेदनशील नेपाली मीडिया बगैर जांच पड़ताल की इतनी बौखला गई है कि,वह बेवजह भारतीय सभी मीडिया के लोगों को अमर्यादित रूप से गाली-गलौज तक देना शुरू कर दिया, जिसका वीडियो पूरी दुनियाँ में वायरल कर एक और बड़ा भयानक विवाद खड़ा कर दिया है,जिसके परिणाम भविष्य में अच्छे नहीं ही सकते। हालांकि नेपाली मीडिया को जब यह होश ही नहीं है कि, वह जहाँ की मीडिया है,उसकी जनसंख्या मात्र 2 करोड़ के आस-पास की ही है,जबकि सवा सौ करोड़ वाला देश भारत, हमेशा नेपाल को अपना पड़ोसी मित्र राष्ट्र होने के तहत हर प्रकार की मदद में काम ही आया है। लेकिन भारत हर बात सह सकता है, किन्तु अपने देश के किसी भी राष्ट्रीय स्तम्भ जैसे सम्मान का अपमान हर्गिज नहीं सह सकता जो कि वास्तव में इतना निंदनीय है,जिसे इस देश का बच्चा-बच्चा भी कभी बर्दास्त नहीं कर पायेगा। मीडिया जो पूरी दुनियां में निष्पक्ष और हरेक देशों मे एक जैसा होता है,उनके बीच अगर एक दूसरे देशों के मीडिया कर्मियों में असमानता भी हो तो कलम के माध्यम से विचारों को तर्कसंगत निपटाया जा सकता है,मगर ये क्या? यहाँ तो नेपाल की मीडिया भारत की मीडिया को अभद्रतापूर्ण गाली-गलौज पर उतारू हो गई है।
    इस खबर में वह वीडियो भी संलग्न है,जिसमें ये नेपाल के प्रमुख राष्ट्रीय दैनिक अखबार “एवरेस्ट पोस्ट”में एडिटर भद्र बी.डी.आर. खड़का की बौखलाहट है,जरा देखिये अर्नब गोस्वामी, सुधीर चौधरी,जैसे सभी वरिष्ट पत्रकारों सहित सभी मीडिया कर्मियों को कुत्ता और न जाने क्या क्या गाली गलौज पर तक उतर आये हैं, “आप खुद ही सुनकर इसे पूरे देश के कोने कोने में शेयर करें, ताकि पूरा देश ये समझ सके कि, चीन के बहकावे में अपने पुराने मित्र राष्ट्र भारत जैसे सहनशील और संवेदनशील देश से नेपाल जिस लिपुलेख,लिम्पियाधुरा और कालापानी की जमीन विवाद के लिये उसके बहकावे में उलझना चाह रहा है,यह उसकी सबसे बड़ी भूल होगी,जबकि नेपाल की उस असंवेदनशील मीडिया या राजनीतिक इतिहास विश्लेषकों को बस एक छोटी सी पड़ताल अवश्य कर लेनी चाहिए कि,जब 1950 में नेपाल ने “संयुक्त राष्ट्र” से “नेपाल” को भी देश का दर्जा देने की मांग की थी,तथा नेपाल के द्वारा उनकी औपचारिकताओं के तहत जो सम्पूर्ण नेपाल का भौगोलिक नक्शा सौंपा गया था,क्या उसमे उसने इन जगहों में लिपुलेख, लिम्पियाधुरा, और कालापानी को दर्शाया था ? नहीं…. यह जवाब आज भी वहाँ शतप्रतिशत स्पष्ट रूप से प्रमाणित है ।
    इस मामला को लेकर एक ओर जहाँ नेपाल चीन के इशारे पर पूरी दुनिया में भारत सरकार,एवम भारतीय मीडिया के बारे में तरह तरह के झूठे और बनावटी तथ्यों के सहारे,नौटंकी कर रहा है, वहीँ दूसरी ओर नेपाल में नेपाल की दो प्रमुख मूल के लोगों में वहाँ की आधी से अधिक जनसंख्या वाला भारतीय समर्थित मधेसी “मूल” जो बांकी जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा है ,जो सरकार के विरोध में बगावत छेड़ दिया है।अब देखना यह है कि,आधी से अधिक भारतीय समर्थित मधेशी मूल की नेपाली जनसंख्या नेपाल की राजनीतिक उथल-पुथल को किस हद तक शांत कर पाती है। अब एक बात और नेपाल अवस्थित वहाँ की माववादी पार्टी समर्थित मीडिया सहित “एवरेस्ट पोस्ट” के वरिष्ठ पत्रकार ” भद्र खड़का” ने जिस प्रकार भारतीय मीडिया के लिये अपमान जनक शब्दों के माध्यम से अभद्रतापूर्ण व्यवहार किया है,उसकी हम भारतीय मीडिया कड़ी निंदा के साथ विरोध भी करतें हैं, साथ ही हम इसे गंभीरता से लेते हुए नेपाल मीडिया के समक्ष भविष्य में इसकी समीक्षा करने का संकल्प लेतें हैं।

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