दर-दर भटकने को मजबूर है, दिहाड़ी मजदूर- पूर्णिया।

जी हां,  आप जानते हैं कि आज मजदूर दिवस है। भारत में सबसे पहले मजदूर दिवस 1 मई 1923 को मनाया गया था, लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान ने चेन्नई में इसकी शुरुआत की थी। लेबर दिवस का मुख्य उद्देश मजदूरों को सम्मान और हक दिलाना है , यूं तो अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस की शुरुआत मई 1886 में अमेरिका के शिकागो से हुई थी।  धीरे-धीरे यह दुनिया के कई देशों में फैल गया ।लोक डॉन के दरमियान में ,भारत में  मजदूरों की दशा की जानकारी शायद किसी से अछूता रहे। दर-दर भटकने की स्थिति में मजबूर  है ,बिहारी मजदूर। दिल्ली और अलग-अलग शहरों से दूर अपने गांव जाने को मजबूर ,पैदल यात्रा 3000 किलोमीटर तक करने के बाद,  सोशल मीडिया, प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के द्वारा कई बार प्रकाशित हो चुका है। हालांकि सरकार के तरफ से भी अलग-अलग दावे को प्रस्तुत किया गया है ,लेकिन वाकई में भारत जैसे- विकासशील देश में मजदूरों की स्थिति बहुत ही दयनीय है, और यह एक बहुत बड़ी समस्या है।  देश में कम मजदूरी पर मजदूरों से काम कराया जाता है, यह एक प्रकार का शोषण है । पैसे के अभाव में मजदूर के बच्चों को शिक्षा से वंचित रहना स्वभाविक है, भारत जैसे देश में अशिक्षा का एक कारण मजदूरी भी है।  पूर्णिया जिला के रोहित यादव जो एक समाज सेवी हैं और श्री राम जानकी गोकुल सिंह ठाकुर बारी न्यास समिति के उपाध्यक्ष भी है । उन्होंने निस्वार्थ भावना से ,मजदूर दिवस के उपलक्ष में ,मजदूरों के बीच डोर टू डोर जाकर उन्हें फूड पैकेट, सैनिटाइजर , मास्क  मुहैया कराया है ,यूं तो रोहित यादव लॉक डॉन के दरमियान, हर रोज अपने कार से गरीब लोगों के बीच जाकर फूड पैकेट, सैनिटाइजर , मास्क, वितरण करते आ रहे हैं, लेकिन उन्होंने मजदूर दिवस के उपलक्ष में मजदूरों के बीच जाकर उनके हौसला को अफजाई करने का एक सफल प्रयास किया है। यदि भावना निस्वार्थ हो और राजनीतिकरण  से  उपर हो तो, समाचार में आना लाजिमी हो जाता है। आज पूर्णिया में गरीबों के लिए मिसाल है, रोहित यादव, जो अपनी जान की परवाह किए बिना हर रोज गरीबों के लिए फूड पैकेट, लेकर उनके बीच चले जाते हैं, यह छोटा सा पहल है ,लेकिन धन्यवाद के पात्र हैं।

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